(16)
لآشئ الآنْ..
يُذكر ..
صمتْ ..
يستوطنُ جغرافيتيّ..
ويعزوا وطنيّ..
ويسلبُ حقَ الفؤادِ من هُناك..
يغتصبْ حتى فرحتيّ..
أكرهكْ..
يا/صمتيّ..
(17)
سأعودُ حينَ
تترتبُ الأبجديةُ من جديدْ..
فالنبضُ يسترقُ السمعَ
من هُنا..!
سأعود ولكن بعد حينْ..
لـأكملَ الثرثره..